शुक्रवार, नवंबर 10, 2017

'कश्मीर की आजादी का पक्षधर नहीं पाकिस्तान

पाक प्रधानमंत्री के बदले सुर
लंदन।  
कश्मीर मुद्दे पर अब पाकिस्तान ने पैंतरा बदल लिया है। पाक प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी ने लंदन स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स में बड़ा बयान देते कहा  कि पाकिस्तान कश्मीर की आजादी का पक्षधर नहीं है और इस मुद्दे का समाधान केवल बातचीत से हो सकता है।
अब्बासी साउथ एशियन सैंटर में फ्यूचर ऑफ पाकिस्तान 2017 कार्यक्रम में भाग लेने   पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि उनका देश बातचीत का समर्थक है, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि दोनों के बीच वार्ता जल्द होने जा रही है।
पाक में अगले साल आम चुनाव होने जा रहे हैं जबकि भारत उसके अगले साल यानी 2019 में आम चुनावों का सामना करेगा। ऐसे में दोनों मुल्क चुनावी व्यस्तता के चलते कश्मीर समस्या के समाधान की तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दे पाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक कश्मीर विवाद का कोई सार्थक हल नहीं निकलता, दोनों देशों के बीच संबंध तल्ख बने रहेंगे।
 एक सवाल के जवाब में उन्होंने साफ इन्कार किया कि उनका मुल्क कश्मीर की स्वतंत्रता के लिए धरातल पर सहायता कर रहा है। उनका कहना था कि इस तरह की बातें फैलाई जा रही हैं, लेकिन उनका मानना है कि संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद का फार्मूला कश्मीर के समाधान के लिए लागू किया जाना चाहिए। इसके तहत व्यवस्था है कि वहां रहने वाले लोगों से रायशुमारी की जाए। उनका यह भी कहना था कि तमाम उठापटक के बीच  पाकिस्तान में आज स्थायित्व है। वहां लोकतंत्र मजबूत स्थिति में है।
 

शुक्रवार, नवंबर 03, 2017

करेंसी की वैधता पर सवाल

आरबीआई को नहीं है 2000 और 200 के नोट छापने का अधिकार!
मुंबई। 
देश के सबसे बड़े बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक के बारे में बड़ा खुलासा हुआ है। भारतीय बैंको की नियामक संस्था के रूप में काम करने वाली क्रक्चढ्ढ के पास नए नोट जारी करने का अधिकार ही नहीं है। सूचना के अधिकार के तहत मांगे गए जवाबों से यह बात सामने आई है।
एक आरटीआई में इस बात का खुलासा हुआ है कि आरबीाअई के पास ऐसे कोई कागजात नहीं है जो यह बता सकें कि नोटबंदी के बाद उनके पास 2,000 रुपए और 200 रुपए की नई करेंसी जारी करने का अधिकार था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नए नोट छापने के लिए कोई सर्कुलर भी नहीं जारी किया गया था। इस विषय में सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मुंबई के एमएस रॉय ने जानकारी मांगी थी। क्रञ्जढ्ढ में मिली जानकारी के अनुसार नोटबंदी से करीब 6 महीने पहले 19 मई 2016 के दस्तावेज के मुताबिक आरबीआई के कार्यकारी निदेशक ने 18 मई 2016 को पेश किए गए प्रस्ताव को निदेशक मंडल ने मंजूरी दी थी।
मंजूर किया गया प्रस्ताव नए बैंक नोटों के डिजाइन, मूल्य और उनके पैमानों से जुड़ा था। इस प्रस्ताव को मंजूर करने के लिए 8 जुलाई 1993 को भी तात्कालीन सरकार के पास भेजा गया था। प्रस्ताव में 10,20,50 100 और 500 रुपए के साइज को कम कर के नए नोटों को शुरू करने की बात शामिल थी।
आरटीआई एक्टिविस्ट रॉय के अनुसार आरबीआई बोर्ड के प्रस्ताव में 1,000 रुपए (विमुद्रीकरण के बाद से चलन में नहीं), 2000 रुपए और बाद में 200 रुपए के करेंसी के डिजाइन या महात्मा की तस्वीर को प्रकाशित करने की कोई चर्चा नहीं हुई। जिससे यह स्पष्ट है कि किसी भी प्रकार की आधिकारिक मंजूरी नहीं दी गई तो आखिर इन नोटों को किसने डिजाइन किया और बिना मंजूर हुए प्रकाशित कैसे हुए?
रॉय के अनुसार आरबीआई बोर्ड ने सार्वजनिक तौर पर किसी भी प्रकार की कोई मंजूरी नहीं दी और ना ही ऐसे कोई दस्तावेज मौजूद हैं, जिससे 200 और 2,000 रुपए की करेंसी की कानूनी वैधता पर बड़ा सवाल है। रॉय ने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए।
इससे पहले 27 फरवरी 2017 को रॉय ने एक अन्य आरटीआई दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने 1 रुपए के नोट पर महात्मा गांधी की तस्वीर ना छापे जाने के दस्तावेज मांगे थे। जवाब में आरबीआई ने 15 जुलाई 1993, 13 जुलाई 1994 और 19 मई 2016 की बोर्ड बैठक के प्रस्ताव की प्रतियां उपलब्ध कराई थीं। हालांकि, ये प्रस्ताव केवल 10, 20, 50, 100 और 500 रुपए के लिए डिजाइन के बारे में बताते हैं, जिन पर महात्मा गांधी की तस्वीर छपी है।क्रक्चढ्ढ बोर्ड के प्रस्ताव के में 1000, 2000 रुपए और हाल में जारी 200 रुपए के नोट डिजाइन की विशेषताओं या महात्मा गांधी की तस्वीर के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
 

बेगूसराय से सीपीआई के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं कन्हैया

पटना।
जेएनयू में कथित तौर पर देशविरोधी नारेबाजी कर सुर्खियों में आये और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार समेत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर लगातार हमलावर रहनेवाले कन्हैया कुमार अपने गृहनगर बेगूसराय से वर्ष 2019 में होनेवाले लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं। सीपीआई बिहार प्रदेश के सचिव सत्यनारायण ने इस बात के संकेत दिये हैं।
वामपंथी दलों का मानना है कि कन्हैया कुमार अभी से ही चुनाव की तैयारियों में जुट गये हैं। वह लोकसभा के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा भी कर रहे हैं। हालांकि, उनके चुनाव लडऩे का आखिरी फैसला गठबंधन के सभी दल मिल कर करेंगे। उम्मीद जतायी जा रही है कि वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव वामपंथी दल बिहार में राजद और कांग्रेस के साथ मिल कर लड़ सकते हैं। ऐसे में वामपंथी दल को पसंदीदा सीट मिलना मुश्किल होगा। इसके बावजूद कन्हैया कुमार जैसे उम्मीदवार को लेकर अन्य पार्टियों को भी कोई ऐतराज नहीं हो सकता है। जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के चुनावी मैदान में उतारे जाने की खबर से सियासी गलियारों में उथल-पुथल शुरू हो गयी है।
कन्हैया कुमार का बेगूसराय से चुनाव लडऩा आसान नहीं होगा। वामपंथियों का गढ़ माना जानेवाली बेगूसराय की सीट पिछले दो बार से भाजपा की झोली में जा रही है। हालांकि, पिछली बार का अंतर काफी मामूली था। वहीं, बेगूसराय से कन्हैया कुमार के चुनाव लडऩे पर टक्कर का मुकाबला होने की संभावना व्यक्त की गयी है। क्योंकि, राजद और कांग्रेस से वामपंथी दलों का गठबंधन होने से लालू प्रसाद समर्थन दे सकते हैं। ऐसे में भाजपा को अपनी सीट पर कब्जा बरकरार रखना आसान नहीं होगा।
जेल से रिहा होने के बाद पटना दौरे पर आये कन्हैया कुमार तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव दोनों से मिले थे। उस समय लालू प्रसाद यादव को पैर छू कर प्रणाम करने पर उनके विरोधियों ने जमकर निशाना भी साधा था। पटना दौरे पर आये कन्हैया का स्वागत भी वीआईपी अंदाज में हुआ था। कन्हैया के पटना एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही उनकी सुरक्षा में दो डीएसपी समेत दर्जनों पुलिसकर्मी तैनात थे। कन्हैया कुमार के स्वागत के लिए जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार भी पटना एयरपोर्ट पहुंचे थे।
पटना में हुई राज्य परिषद की कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक में भी कन्हैया कुमार का मामला उठा था। बैठक में शामिल सीपीआई राष्ट्रीय काउंसिल के  सचिव केआर नारायण ने कहा था कि कन्हैया को केरल से भी लोकसभा चुनाव लड़ाने का प्रस्ताव है, लेकिन बिहार इकाई की मांग है किउन्हें बिहार से ही खड़ा किया जाये। वहीं, सीपीआई के बिहार प्रदेश सचिव सत्यनारायण सिंह ने कहा है कि कन्हैया कुमार आनेवाले 2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार की बेगूसराय सीट से सीपीआई के उम्मीदवार होंगे। साथ ही कहा कि चुनाव लडऩे के मुद्दे पर कन्हैया कुमार से भी बातचीत भी हो गयी है।

कांग्रेस की अहम बैठक के बाद राहुल गांधी ने नोटबंदी और जीएसटी पर साधा निशाना

नई दिल्ली।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में पार्टी महासचिवों और राज्यों के प्रभारियों के साथ अहम बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के दिन 8 नवंबर को किस बात का जश्न होगा? मुझे समझ में नहीं आता। राहुल ने नोटबंदी और जीएसटी को देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका बताते हुए इसकी तुलना बम और टॉर्पीडो से की।
उन्होंने कहा, मोदी सरकार की दो बड़ी आर्थिक नीतियों नोटबंदी और जीएसटी से लोगों को अपार दुख हुआ है। अच्छे आइडिया को कैसे भ्रष्ट किया जा सकता है, जीएसटी इसका उदाहरण है। राहुल ने कहा कि मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी और जीएसटी के दो बम मारे हैं। इसके बाद राहुल ने नोटबंदी और जीएसटी को टॉर्पीडो बताते हुए कहा, एक टॉर्पीडो ने अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका दिया, तो दूसरे ने उसे डुबो ही दिया। पहला टॉर्पीडो नोटबंदी का था, तो दूसरा ठीक तरीके से लागू नहीं की गई जीएसटी का।
गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव के मद्देनजर यह बैठक काफी अहम है। इसके अलावा 8 नवंबर को नोटबंदी के भी एक साल पूरे हो रहे हैं और कांग्रेस उस दिन देशभर में विरोध-प्रदर्शन करने वाली है। ऐसे में मोदी सरकार के घेरने के लिए रणनीतिक चर्चा के लिहाज से भी यह बैठक काफी अहम रही।
बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम भी शामिल हुए। सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं ने नोटबंदी और जीएसटी पर मोदी सरकार को घेरने की कारगर रणनीति सुझाई। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पहले ही कह चुके हैं कि नोटबंदी और जीएसटी की वजह से देश की अर्थव्यवस्था आईसीयू में है। नोटबंदी के एक साल पूरा होने पर कांग्रेस 8 नवंबर को देशभर में विरोध-प्रदर्शन करने वाली है। कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन का थीम एमएमडी यानी मोदी मेड डिजास्टर (मोदी की लाई हुई त्रासदी) रहेगा। माना जा रहा है कि बैठक में उस विरोध-प्रदर्शन की विस्तृत रूप-रेखा पर चर्चा हुई।
सूत्रों के मुताबिक बैठक के अजेंडे में गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव की रणनीति भी शामिल थे। गुजरात में पाटीदारों की बीजेपी से नाराजगी और पिछले साल सूबे में दलित आंदोलन का चेहरा रहे जिग्नेश मेवानी के कांग्रेस को समर्थन से पार्टी उत्साहित है। इसके अलावा ओबीसी आंदोलन का चेहरा रहे अल्पेश ठाकोर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। इससे कांग्रेस को उम्मीद बंधी है कि सूबे की सत्ता से उसका 22 साल का वनवास खत्म हो सकता है।
पाटीदार अनामत आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को साधना कांग्रेस के लिए अब भी बड़ी चुनौती है। बीजेपी का खुलकर विरोध कर रहे पटेल ने कांग्रेस को समर्थन देने के मुद्दे पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। उन्होंने कांग्रेस को अल्टिमेटम दिया है कि पार्टी पटेल आरक्षण के मुद्दे पर 3 नंवबर तक अपना रुख स्पष्ट करे। पटेल चाहते हैं कि कांग्रेस स्पष्ट करे कि वह किस तरह से पटेल समुदाय को नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण देगी। सूत्रों के मुताबिक बैठक में हार्दिक पटेल को लेकर भी चर्चा होनी थी, हालांकि बैठक के बाद किसी भी नेता ने इस बात का जिक्र नहीं किया।
कांग्रेस को इस बार गुजरात में स्थितियां अपने लिए अनुकूल लग रही हैं, जिससे पार्टी उत्साहित है। पार्टी अब केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाकर दूसरे राज्यों में भी पार्टी कार्यकर्ताओं में नए जोश और उत्साह का संचार करना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक बैठक में पार्टी महासचिवों और राज्यों के प्रभारियों के साथ मोदी सरकार को घेरने की रणनीति पर विस्तृत चर्चा होनी है। अगले कुछ हफ्तों में राहुल गांधी की कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर ताजपोशी होनी है और माना जा रहा है कि इस बैठक के जरिये कांग्रेस उपाध्यक्ष यह संकेत देने की कोशिश कर रहे हैं कि वह पार्टी की कमान संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

नवंबर में जीएसटी से मिलेगा तोहफा!

चीजें होंगी सस्ती, कारोबारियों पर टैक्स का भार कम

नई दिल्ली। 
नवंबर महीने में जीएसटी काउंसिल आम आदमी के साथ ही छोटे और मझोले कारोबारियों को सौगात देने वाली है। 10 नवंबर को गुवाहाटी में जीएसटी परिषद की बैठक है। इसमें आम आदमी को जहां सस्ते सामान और सेवा का तोहफा मिल सकता है। वहीं, कारोबारियों पर टैक्स का भार कम किया जा सकता है।
कंपोजिशन स्कीम को लेकर असम के वित्त मंत्री हेमंत विश्वशर्मा की अध्यक्षता में बने मंत्री समूह ने कुछ अहम सुझाव दिए हैं। जीएसटी परिषद आने वाली बैठक में इन सुझावों को अपना सकती है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि नवंबर में कौन-कौन सी चीजें सस्ती हो सकती हैं।
बाहर खाना होगा सस्ता  मंत्री समूह ने सुझाव दिया है कि एसी रेस्तरां पर लगने वाले 18 फीसदी जीएसटी को घटाकर 12 फीसदी कर दिया जाए। वित्त मंत्री अरुण जेटली भी पहले एसी होटलों पर लगने वाले रेट को घटाने का संकेत दे चुके हैं।
माना जा रहा है कि 10 नवंबर की बैठक में परिषद एसी रेस्तरां पर लगने वाले रेट को कम जरूर करेगी। इससे आपको ऐसे होटलों में खाना खाने पर कम बिल चुकाना होगा।
कंपोजिशन स्कीम के तहत मिलेगा फायदा : कंपोजिशन स्कीम की सीमा 1 करोड़ से बढ़ा कर डेढ़ करोड़ की जा सकती है। इससे कई और कारोबार इस स्कीम के तहत आ सकते हैं। इसके अलावा मैन्युफैक्चर्स को सकल बिक्री पर 2 की जगह 1 प्रतिशत, रेस्टोरेंट के लिए 5 की जगह 1 प्रतिशत और ट्रेडर्स के लिए 1 की जगह 0.5 प्रतिशत कर भुगतान का सुझाव दिया गया है।
आम आदमी को मिलेगी ये राहत : कंपोजिशन स्कीम की सीमा बढऩे और होटल व मैन्युफैक्चरर्स के लिए टैक्स दर घटने से आम आदमी को भी फायदा मिलेगा। कंपोजिशन स्कीम का फायदा लेने वाले कारोबारी इसका लाभ ग्राहकों तक बढ़ा सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो इन होटलों में लंच करना आपके लिए दूसरे होटलों के मुकाबले काफी सस्ता हो सकता है।
घर खरीदना हो सकता है सस्ता : इस बैठक में रियल इस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली यह संकेत दे चुके हैं। जेटली ने कह चुके हैं कि रियल इस्टेट के जीएसटी के दायरे में आने से लोगों को कई तरह के टैक्स भरने से राहत मिलेगी। इसके बाद उन्हें सिर्फ एक ही टैक्स भरना होगा।
10 नवंबर की बैठक में इस पर मुहर लग सकती है। एक ही टैक्स भरने से घर की कीमतों में कमी आ सकती है और आम आदमी के लिए घर खरीदना सस्ता हो सकता है।
घर में यूज होने वाले सामान होंगे सस्ते : मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को कंपोजिशन स्कीम के तहत लगने वाले टैक्स के मामले में राहत देने की तैयारी है। मंत्री समूह ने भी यह सुझाव दिया है। ऐसे में आपके घर में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें जैसे कि बाथरूम टाइल, स्टील का सामान समेत अन्य चीजें सस्ती हो सकती हैं।
राजस्व सचिव हंसमुख अधिया कह चुके हैं कि 28 फीसदी के स्तर पर कुछ उत्पादों का रेट कम किया जा सकता है। इन पर 12 से 18 फीसदी रेट लगाया जा सकता है। ऐसे में 28 फीसदी की रेंज में आने वाले आम लोगों के काम की चीजें सस्ती हो सकती हैं।