शुक्रवार, अगस्त 04, 2017

80068 करोड़ रु के पैकेज से 62236 करोड़ रु की मंजूरी

 केंद्रीय गृह सचिव ने जम्मू कश्मीर सरकार की प्रशंसा की
दीपाक्षर टाइम्स संवाददाता
श्रीनगर।
 
केंद्रीय गृह सचिव राजीव मेहऋषि ने सोमवार को प्रधान मंत्री विकास पैकेज (पीएमडीपी) के तहत राज्य में चुनौतीपूर्ण स्थिति में प्रमुख विकास परियोजनाओं पर उचित प्रगति के लिए जम्मू और कश्मीर सरकार को बधाई दी।
केंद्रीय गृह सचिव, जम्मू-कश्मीर में पीएमपी-2015 परियोजनाओं के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा के लिए सोमवार को यहां आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
केंद्रीय गृह सचिव ने कहा कि कुछ परियोजनाओं में मामूली तकनीकी मुद्दे शामिल हैं जिन्हें इस प्रकार की गति को बढ़ाने के लिए भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों के साथ उचित स्तर पर उठाए जाएंगे।
केन्द्रीय दल जो कल यहां पहुंचा था, उसमें राजीव गाबा, ओएसडी केंद्रीय गृह मंत्रालय, जो जल्द ही केंद्रीय गृह सचिव कापदभार संभालेगे,  केपी .ष्णन केंद्रीय कौशल विकास मंत्रालय, आई श्रीनिवास केन्द्रीय युवा मामलों के मंत्रालय और खेल मंत्रालय, गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, मानव संसाधन विकास, युवा मामले और खेल, .षि और परिवार कल्याण, पर्यटन, शहरी विकास, रक्षा, कपड़ा, सड़क परिवहन और अन्य मंत्रालयों के वरिष्ठ सचिव ज्ञानेश कुमार, राजमार्ग, वित्त, विद्युत, ग्रामीण विकास, जल संसाधन, नई और नवीकरणीय ऊर्जा, कौशल विकास और राष्ट्रीय कार्यक्रम शामिल हैं।
राज्य आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल में सभी विभागों के प्रशासनिक सचिवों का नेतृत्व मुख्य सचिव बी बी व्यास ने किया। महा निदेशक पुलिस डॉ एस पी वैद और जम्मू तथा कश्मीर संभागों के  मंडलायुक्त भी बैठक में उपस्थित थे।
विशेष रूप से, पीएमडीपी के अंतर्गत, राज्य में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकार के विभागों के माध्यम से 63 परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं।
7 नवंबर, 2015 को श्रीनगर में एक जनसभा में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित किए गए 80068 करोड़ के विकास पैकेज में अब तक 622236 रुपये मंजूर किए गए हैं।
पीएमडीपी के तहत परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए सोमवार को की बैठक में व्यापक चर्चा की गई जिसमें बाढ़ पीडि़तों के लिए राहत और पुनर्वास प्रयासों के पूरक के साथ-साथ सड़क संपर्क, बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, पर्यटन सहित जम्मू एवं कश्मीर में बुनियादी ढांचा बढ़ाना शामिल है।
राज्य के मुख्य सचिव ने प्रत्येक क्षेत्र के अंतर्गत किए गए वित्तीय और शारीरिक प्रगति के बारे में केंद्रीय गृह सचिव को अवगत कराया।
बैठक में बताया गया था कि 80,000 करोड़ रुपये के पैकेज में से करीब 40000 करोड़ रुपये जम्मू और श्रीनगर में अर्ध-रिंग रोड सहित और महत्वपूर्ण राजमार्गों के उन्नयन के अलावा सड़क ढांचे में सुधार के लिए निर्धारित किए गए हैं।
पीएमपीपी के तहत शुरू किए गए कनेक्टिविटी परियोजनाओं में भारत माला के अंतर्गत सड़कें शामिल हैं जिनमें से 2700 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 105 किलोमीटर की दूरी पर पर्यटक सम्पर्क  में जोजिल्ला सुरंग 9090 करोड़ रुपये, कारगिल-जंस्कार सड़क का 4200 करोड़ रुपये से उन्नयन, श्रीनगर-शोपियां-काजीगुंड राजमार्ग 1800 करोड़ रुपये, जम्मू-अखनूर-पुंच राजमार्ग का उन्नयन 5100 करोड़ रुपये, चनैनी -सुद्धमहादेव-गोहा सड़क 2100 करोड़ रुपये, लचूलुंगा पास और तांगलांग पास में सुरंगों का निर्माण 5000 करोड़ रूपये, जम्मू में अर्ध रिंग रोड का निर्माण 1400 करोड़ रुपये,  श्रीनगर में 1860 करोड़ रुपये में अर्ध रिंग रोड का निर्माण, डबल लेन सड़क का निर्माण बटोत -किश्तवाड़-सिंथन पास-अनंतनाग 130 करोड़ रुपये, उधमपुर-रामबन सड़क 2137, रामबन-बनिहाल रोड 2169 राजमार्ग और श्रीनगर-बनिहाल सेक्शन के साथ-साथ सुरंग सहित 2121 करोड़ रुपये शामिल हैं।
इसमें श्रीनगर-उड़ी-कमान पोस्ट सड़क का उन्नयन और 233 करोड़ रुपये की लागत से श्रीनगर-लेह सड़क का दोहरीकरण शामिल है और 1707 करोड़ रुपये की लागत से नीमू-पदम-दर्चा सड़क का उन्नयन भी शामिल है।
इसके अलावा, 11708 करोड़ रुपये बिजली, नई और अक्षय ऊर्जा के लिए हैं,इसमें बिजली के बुनियादी ढांचे और वितरण प्रणाली, सौर ऊर्जा और छोटे जल विद्युत परियोजनाओं को शामिल करना शामिल है।
बिजली वितरण क्षेत्र में, पूंजीगत शहरों और पर्यटन स्थलों सहित वितरण प्रणाली के लिए बुनियादी ढांचे के संवर्धन के लिए 3790 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसमें डीडीयूजीजेवाई और आईपीडीएस के स्मार्ट ग्रिड और स्मार्ट मीटर सहित अग्रिम तकनीक के हस्तक्षेप के लिए 105 करोड़ रुपये रखे गए हैं, पाकुल जल विद्युत परियोजना के लिए 4153 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं जबकि 1115 श्रीनगर-लेह 200 केवी ट्रांसमिशन लाइन के लिए निर्धारित किए गए हैं। बाढ़ राहत, पुनर्निर्माण और बाढ़ प्रबंधन के लिए 7854 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इसमें झेलम नदी और उसके सहायक नदियों के व्यापक बाढ़ प्रबंधन के लिए 1458 करोड़ रुपये शामिल हैं।
करीब 2241 करोड़ रुपये का लक्ष्य पर्यटन और पर्यटन परियोजनाओं के विकास के लिए है और 50 पर्यटन गांवों की स्थापना के लिए है।
राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए 4900 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है जिसमें अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी ढांचा बनाने के लिए दो एम्स की स्थापना और समर्थन शामिल है।
इसमें शहरी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 1600 करोड़ रुपये, राज्य में बागवानी के विकास के लिए 529 करोड़ रुपये, डल और नगीन झीलों के पुनर्वास के लिए 273 करोड़ रुपये, जम्मू में आईआईएम परिसर की स्थापना के लिए 1000 करोड़ रुपये, 1000 करोड़ रुपये आईआईटी जम्मू के लिए, एनआईटी श्रीनगर के आधुनिकीकरण के लिए 100 करोड़ रुपये, लड़कियों के हॉस्टल के निर्माण के लिए 50 करोड़ रुपये, उच्च अंत सुरक्षा व्यवस्था के लिए 500 करोड़ रुपये, पीओके और छम्ब से 36384 परिवारों को एक मुश्त मुआवजे के लिए 1000 करोड़ रुपये, 300 करोड़ रुपये 5 नए आईआरपी बटालियन के लिए, एसपीओ की पारिश्रमिक 3,000 रुपये से बढ़ाकर 6000 रुपये के लिए 450 करोड़ रुपये, प्लेसमेंट से जुड़े योजनाओं के माध्यम से 1 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए एचआईएमएआईटी योजना के तहत प्रयासों को बढ़ाने के लिए 250 करोड़ रुपये, पश्मिना के लिए 50 करोड़ रुपये, खेल के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 200 करोड़ रूपए शामिल हैं।
केन्द्रीय गृह सचिव ने काम की गति में तेजी लाने के लिए कहा और आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार पीएमडीपी के प्रभावी और कुशल कार्यान्वयन के लिए सभी संभव समर्थन प्रदान करेगी।
बाद में, केंद्रीय गृह सचिव ने राज्य में जम्मू और कश्मीर पुलिस, नागरिक प्रशासन, सेना, अर्धसैनिक बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ सुरक्षा स्थिति की भी समीक्षा की।
मुख्य सचिव बी बी व्यास, प्रमुख सचिव गृह  आर के गोयल, पुलिस महानिदेशक डॉ एस पी वेद और सुरक्षा एजेंसियों तथा अर्धसैनिक बलों के वरिष्ठ अधिकारी ने बैठक में भाग लिया।

'व्यापारियों द्वारा कम्प्यूटरीकृत बिलिंग लागू करवाने के निर्देश

दीपाक्षर टाइम्स संवाददाता
जम्मू।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों (एफसीएस और सीए) व सूचना मंत्री चौधरी जुल्फकार अली ने जीएसटी के प्रभाव पर चर्चा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की।
वाणिज्यिक टैक्स, माप तोल तथा एफसीएस व सीए  विभाग के अधिकारियों ने राज्य में जीएसटी के क्रियान्वयन के बाद पूर्व-पैक किए गए वस्तुओं के स्टॉक पर मुनाफे की जांच के लिए निवारणीय उपायों पर चर्चा की।
बैठक में उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए गए।
बैठक में, मंत्री ने प्रवर्तन एजेंसियों को परिर्वतन अवधि के दौरान सर्तक रहने का निर्देश दिया ताकि व्यापारियों को उपभोक्ताओं ने अधिक भुगतान न किया हो। उन्होंने उनसे यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि जब तक नये टैक्स व्यवस्था के तहत वस्तुओं की बाजारों में कमी है, जीएसटी का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचे।  उन्होंने जीएसटी शासन को स्थानांतरित करने में व्यापार समुदाय की सहायता करने के लिए उन्हें तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशन दिया,' कम्प्यूटरी.त बिलिंग के बिना उत्पादों को बेचने से बचने को कहा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह व्यापारियों को स्पष्ट किया जाना चाहिए कि वस्तुओं की संशोधित दरों को बिलों में ठीक से प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
मंत्री ने दूर दराज व दुर्गम क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के लिए कहा। उन्होंने वाणिज्यिक कर विभाग से एफसीएस और सीए व माप तौल विभाग के अधिकारियों के लिए जीएसटी के विभिन्न पहलुओं, पृष्ठभूमि, अवधारणा, पंजीकरण, करों के प्रकार और नए टैक्स शासन (जीएसटी) और वैट के बीच अंतर के बारे में शिक्षित करने के लिए एक कार्यशाला आयोजित करने के लिए कहा। ।
उन्होंने बल दिया कि उद्योगपतियों और व्यापारियों को भी कार्यशाला में शामिल होना चाहिए।
 बैठक में आयुक्त सचिव एफसीएस और सीए शफीक अहमद रैना, आयुक्त वाणिज्यिक कर  पीआई खातिब, निदेशक एफसीएस व सीए आरए इंकलाबी, अतिरिक्त आयुक्त वाणिज्यिक कर अनु मल्होत्रा, संयुक्त नियंत्रक एलएमडी अमर सिंह, उप-नियंत्रक एलएमडी मनोज प्रभाकर, सहायक निदेशक और निरीक्षक शामिल थे।

देवेंद्र बहल ने पाकिस्तान को भेजीं खुफिया जानकारी!

जम्मू। 
हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी के कानूनी सलाहकार देवेंद्र सिंह बहल को जब एनआईए ने हिरासत में लिया तो कई सच्चाइयां खुलती चली गईं।  एनआईए ने कट्टरवादी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के करीबी देविंदर सिंह बहल को लेकर बड़ा दावा किया है।बताया जा रहा है कि बहल कथित रूप से पाकिस्तान के उच्चायोग के संपर्क में था। बहल ने भारतीय सैनिकों के मूवमेंट जैसी खुफिया सूचनाएं पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई के साथ साझा की हैं।
देवेंद्र  बहल की मानें तो इस पूरे आतंकी खेल का एक खिलाड़ी नईम गिलानी भी है, सैय्यद अली शाह गिलानी का बेटा भी इसमें शामिल है।
एनआईए ने लगातार दूसरे दिन अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के करीबी देवेंद्र सिंह बहल से पूछताछ की और सोमवार को उसके जम्मू स्थित नौशेरा आवास पर छापेमारी की। इससे पहले रविवार को भी देवेंद्र के घर छापेमारी की गई थी।
एनआईए की जांच और छापेमारी के दौरान बहल के बैंक अकाउंट में 35 लाख रुपये मिले हैं।
एनआईए के अधिकारी का कहना है कि एक वकील के लिए, जिसकी वकालत खास नहीं चलती, 35 लाख की बचत कुछ ज्यादा दिखती है। एनआईए बहल से इस पैसे के सोर्स के बारे में भी पूछताछ करेगी। एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, हमें संदेह है कि पाकिस्तानी उच्चायोग के लोगों के साथ संपर्क में रहने वाले बहल ने आईएसआई के जासूसों को खुफिया सूचनाएं देकर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला। यह एक गंभीर अपराध है और उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 121 (राज्य के खिलाफ युद्ध छेडऩे) के तहत केस का आधार तैयार करता है। बता दें कि छापेमारी के दौरान एनआईए को अलगवावदियों से जुड़े कुछ आपत्तिजनक दस्तावेजों के अलावा चार मोबाइल फोन मिले थे। इन सब में टीम को गिलानी के हस्ताक्षर वाला प्रोटेस्ट कैंलेडर भी मिला था जिसमें यह बताया गया था कि घाटी में किस दिन कौन का प्रदर्शन करना है। 

सामने आया अलगाववादियों का सच

कश्मीर यूं ही नहीं जल उठता
जम्मू। 
पिछले वर्ष आतंकी बुरहान बानी के सफाए के बाद कश्मीर घाटी सुलग उठी थी। करीब 115 दिनों तक घाटी में जनजीवन बेपटरी हो गया था। आम लोग घरों में कैद होने के लिए मजबूर थे। जम्मू-कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती आम लोगों से शांति बहाली की अपील कर रहीं। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इंसानियत, कश्मीरियत और जम्हूरियत की हिफाजत करना सरकार की जिम्मेदारी है। कश्मीर, भारत का ताज है और उस ताज को बचाए रखने के लिए सरकार हर मुमकिन कोशिश कर रही है। लेकिन क्या आपको पता है कि कश्मीर की सड़कों पर पत्थरबाजी करने वालों का आतंकी बुरहान बानी से किसी तरह का लगाव नहीं था, बल्कि वो उन अलगाववादी नेताओं के इशारे पर काम कर रहे थे, जो पाकिस्तान की सरपरस्ती में साजिश रचते हैं।
उजली दाढ़ी और शराफत का चेहरा लेकर आजादी का राग अलापने वाले गिलानी उनके अगुवा थे। गिलानी के नापाक मंसूबों की पोल परत दर परत खुल रही है। जांच एजेंसी एनआइए के हाथ एक कैलेंडर लगा है, जिससे साफ है कि गिलानी किस तरह का खेल करते रहे हैं। सबसे पहले ये जानने की कोशिश करते हैं कि गिलानी के दस्तखत वाले कैलेंडर में क्या कुछ है।
4 अगस्त 2016-  सेना और सुरक्षाबलों के खिलाफ प्रदर्शन की अपील।
6 अगस्त - को लोगों से अलग-अलग इलाकों में इकठ्ठा होकर धरना प्रदर्शन की अपील की गई।
8 अगस्त- श्रीनगर जाने वाली सभी सड़कों को ब्लॉक करने की अपील के साथ लोगों से ये कहा गया कि वो अपने दफ्तरों में न जाएं।
9 अगस्त- औरतों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की गई थी। इसके साथ ही घाटी के अलग-अलग इलाकों में इस्लामिक और आजादी के गानों को बजाने की अपील की गई।
10 अगस्त- घाटी के लोगों से कहा गया कि वो सुरक्षाबलों को खत दें, जिसमें ये लिखा जाए कि वो घाटी को छोड़ दें।
14 अगस्त - पाकिस्तान दिवस दिन के विशेष कार्यक्रम हों, सभी मस्जिदों में 14 अगस्त को आजादी के गाने बजाए जाएं।
15 अगस्त-  कश्मीर में काला दिवस मनाने के साथ घरों, चौराहों पर काले झंडे लगाए जाएं।
पैंथर्स पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भीम सिंह ने कहा कि कश्मीर समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार को ठोस नीति की घोषणा करनी चाहिए। आप एक झंडा और एक विधान के बगैर कश्मीर की समस्या का हल नहीं निकाल सकते हैं। टुकड़ो में किए जा रहे प्रयासों का कोई अर्थ नहीं है। केंद्र सरकार और भाजपा धारा 370 के बारे में स्पष्ट राय क्यों नहीं रख रही है। जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीडीपी गठबंधन के साथ साथ केंद्र में भी भाजपा की सरकार है। केंद्र सरकार चाहे तो कन्याकुमारी में जो कानून लागू है वो जम्मू-जम्मू-कश्मीर में भी लागू कर सकती है। 
गिलानी के हस्ताक्षर वाला कैलेंडर अलगाववादी नेता अल्ताफ शाह के घर से मिला था। इसमें सुरक्षाबलों के खिलाफ लोगों को भड़काने की साजिश का पूरा खाका है। कैलेंडर अगस्त 2016 का बताया जा रहा है। इससे पहले भी जांच एजेंसियों के हाथ कई जानकारियां लगी थीं, जिनमें हुर्रियत और आतंकी गुटों के बीच फंडिंग की जानकारी सामने आई थी। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है। कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं मसलन अलगाववादी नेताओं के पास अकूत संपत्ति है। इन अलगाववादी नेताओं को सीमापार और हवाला के जरिए पैसे मिलते हैं।
एनआइए ने रविवार को गिलानी के करीबी वकील देविंदर सिंह बहल के जम्मू स्थित घर पर छापा मारा। एनआइए अधिकारियों का मानना है कि कैलेंडर से ये साफ है कि सोची समझी रणनीति के तहत गिलानी सेना और सुरक्षाबलों को निशाना बनाने की रणनीति पर काम कर रहे थे। सेना और सुरक्षाबलों पर कब और कहां निशाना बनाना है, इसका खाका पहले ही तैयार किया जाता है। सुरक्षाबलों के खिलाफ माहौल बनाने के लिए लोगों को उकसाया जाता है।
एनआइए ने गिलानी के दूसरे बेटे नसीम को समन कर पूछताछ के लिए बुलाया है। इसके अलावा उसके दामाद और पेशे से सर्जन नयीम से भी पूछताछ हुई है। वो 11 साल बाद 2010 में पाकिस्तान से वापस भारत आया था। उसे गिलानी का उत्तराधिकारी भी माना जाता है। गिलानी के एक दामाद अल्ताफ अहमद शाह की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है।
 

लश्कर चीफ अबू दुजाना मारा गया

दीपाक्षर टाइम्स संवाददाता
जम्मू। 

भारतीय सेना को जम्मू-कश्मीर में एक बड़ी कामयाबी मिली है। घाटी में लश्कर-ए-तैयबा का चीफ अबु दुजाना मारा गया है। भारतीय सेना की नजर काफी समय से अबु दुजाना पर थी। लेकिन अब जाकर दुजाना हत्थे चढ़ा और मारा गया।
खुफिया जानकारी से पता चला है कि दुजाना के मारे जाने में उसके मोबाइल फोन का बड़ा रोल है। हाल में पुलिस ने उसको पकडऩे के लिए एक ऑपरेशन चलाया था। उस वक्त वो भागने में सफल रहा लेकिन गाड़ी में उसका मोबाइल फोन रह गया था। सुरक्षाबलों को उसके मोबाइल से उसके कॉन्टैक्ट और उनकी ट्रैकिंग से आतंकियों का मूवमेंट का पता चला। सुरक्षाबल लगातार दुजाना की गतिविधियों को ट्रैक कर रहे थे और मंगलवार को तड़के पुलवामा के बाकरीपोरा में उसे घेर लिया गया।
सुबह 4 से 5 बजे के करीब सेना ने कश्मीर के पुलवामा जिले के हाकरीपोरा गांव में मुठभेड़ शुरू की।
हाकरीपोरा गांव को सेना ने चारों ओर से घेर लिया था।
इसके बाद सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई।
दुजाना जिस घर में छुपा था, उसने वहां से करीब 4 घंटे तक एक भी गोली नहीं चलाई थी।
हालांकि सेना ने उस घर को घेरा हुआ था, जिसके बाद सेना ने उस घर को रॉकेट लॉन्चर दागा। और आग लगा दी।
अबु दुजाना के अलावा इस एनकाउंटर में आरिफ ललहारी भी मारा गया है। हालांकि अभी दुजाना के शव की शिनाख्त है।
अबु दुजाना लश्कर का टॉप कमांडर था। पिछले कई महीनों से सुरक्षाबलों ने दुजाना का मारने के लिए कई ऑपरेशन चलाए थे। उसपर सुरक्षाबलों ने 10 लाख का इनाम घोषित कर रखा था।
सीआरपीएफ की 182 बटालियन, 183 बटालियन, 55 राष्ट्रीय राइफल और एसओजी की टीम ने इलाके को घेरकर सर्च अभियान शुरू किया।
सुरक्षाबलों को इलाके में आतंकियों के मौजूद होने की खबर मिली थी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने हाकरीपोरा में घेरा डाला।
19 जुलाई को भी सेना ने अबु दुजाना को घेरा था। पुलवामा के बंदेरपुरा गांव में सेना और एसओजी के जवानों ने अबु दुजाना को पकडऩे के लिए जाल बिछाया था। मगर दुजाना चकमा देकर फरार हो गया था। इससे पहले मई महीने में भी सुरक्षाबलों ने हकरीपोरा गांव में ही सुरक्षाबलों ने दुजाना की घेराबंदी की थी। खबर मिली थी कि अबु दुजाना अपने साथियों के साथ गांव में छिपा है। जिसे पकडऩे के लिए सेना ने ऑपरेशन चलाया। उस दौरान गांववालों की पत्थरबाजी के बीच अबु दुजाना फरार होने में सफल रहा था।
बता दें कि सेना कश्मीर से आतंकियों का सफाया करने के लिए ऑपरेशन ऑलआउट अभियान चलाया है। इसके तहत आतंकियों की एक लिस्ट तैयार की गई है। जिसके आधार पर अलग-अलग इलाकों में आतंकियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन उन्हें ढेर किया जा रहा है। अब तक इस ऑपरेशन के तहत करीब 100 आतंकियों को घाटी में ढेर किया जा चुका है। दो दिन पहले पुलवामा के तहाब इलाके में सुरक्षाबलों के ऑपरेशन में हिज्बुल के दो आतंकी ढेर हो गए थे।
अबु दुजाना के मारे जाने पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला का कहना है कि अबु दुजाना के मारे जाने से काफी फर्क पड़ेगा, ये अच्छी बात है। ये एक अच्छी कामयाबी है, ऐसे लोगों को मारे जाने से अमन आएगा। यह चीजें खत्म होनी चाहिए ताकि लोग आजादी का सांस ले सकें। एक आदमी मर जाए तो दूसरा तो आएगा ही, यह भगवान का रास्ता है। एक आतंकी जाता है दूसरा आता है क्या करेंगे। ऐसे लोगों के मारे जाने से घाटी में फर्क पड़ेगा।
गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर का कहना है कि आतंकी कोई भी हो आतंकी आतंकी होता है कोई भी मारा जाता है तो कामयाबी होती है और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। कश्मीर में शांति कायम करने के लिए आतंकियों के खिलाफ जो अभियान छेड़ा हुआ है वह जारी रहेगा, किसी भी आतंकी को छोड़ा नहीं जाएगा।